तुम कब मिलोगे
मैं इंतज़ार की चौखट पर हर रोज़ दीप जलाती हूँ, तुम्हारी आहट की कल्पना में चुपचाप मुस्कुराती हूँ। लोग कहते हैं — समय सबको उसका अपना दे देता है, पर मेरा समय तो जैसे तुम्हारे नाम पर ही ठहर जाता है। कभी सुबह की पहली किरण में तुम्हारा चेहरा ढूँढती हूँ, कभी शाम की ढलती रोशनी में तुम्हारी परछाईं बुनती हूँ। मेरे जीवनसाथी, तुम कब मिलोगे? मैं इसी उम्मीद में जी रही हूँ, जैसे सूखी धरती पहली बारिश की प्रतीक्षा करती है। मेरी दुआओं में तुम्हारा नाम है, मेरी चुप्पियों में तुम्हारी आवाज़, मेरे हर अधूरे ख्वाब का तुम ही तो अंदाज़ हो। शायद किसी मोड़ पर, किसी साधारण से दिन में, तुम अचानक मिल जाओगे और मेरी प्रतीक्षा प्रेम में बदल जाएगी। तब मैं कहूँगी — देखो, मैं हार नहीं मानी थी, मैं उम्मीद में जीती रही, क्योंकि मुझे विश्वास था कि तुम… किस्मत बनकर एक दिन ज़रूर आओगे। 💫
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