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सुनी आँखों मे दफ़्न है अश्क़ मेरे ए दोस्त, कोई अगर हाल पुछता, तो रिहयी देते। तू आवाज़ों के दरमियां इस कदर गुम था, मेरे ख़ामोश अफसाने तुझे सुनाई कैसे देते। काश तुझको मेरे ये जख्म दिखाई देते, हम अपने गम की इस कदर न दुहयी देते। हमे रहने दो हमारे ही हाल मे अब तुम, बड़ी मुद्दत हुई , हर बात की सफाई देते। इस शहर मे दुआ सलाम का दस्तूर नही, भला कैसे ये खुदा हमे खुदाई देते।
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