हो रही है....
उसे इज़हार-ए-इशक की ख़्वाहिश हो रही है मेरे ख़िलाफ़ महफ़िलों में साज़िश हो रही है उसका है वादा कल जरूर मिलने का इसी खुशी में अब यहां बारिश हो रही है हवाओं पर सफ़र करना उसका शौक़ है उसके ही ख्वाबों की हमें दानिश हो रही है उसे मेरा चेहरा नहीं दिखता झुलस्ती धूप में अंधेरी रात में वो जिस क़दर ताबिश हो रही है हमे जो सता रहा है बाहर निकलने का डर साथ चलने की जो उससे गुज़ारिश हो रही है LAKSHAY ✨
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