आज तू जिंदा होता
आज तू जिंदा होता, अगर तू हिंदू ना होता उनकी यह हिमाकत न होती अगर, हाथ में कलावा ना होता। जिसने कलमा पढ़ा, उसे छोड़ा नहीं तो नंगा किया पेंट उतार वाह रे ! जेहादी तेरा आतंक! काफिर कह कर किया प्रहार नाम न पूछा ,काम न पूछा ना पूछी तुमने भाषा, राज्य न पूछा, देश ने पूछा ना पूछी तुमने मनसा । जाति न पूछा जेहादी ने और न पूछा कर्म, था केवल एक ही सवाल उसका क्या है तेरा धर्म ? नरसंहार में है वह माहिर, मानवता से है वह बाहिर जेहादी का यही रुधिर है जो हिंदू है वह काफिर है। यह हत्या नहीं ऐलान है , युद्ध का धनुष टंकार है । उसने रंगा है कश्मीर को खून से यह कत्ल नहीं नरसंहार है ।। इंसानियत को कर तार तार मानवता को कर शर्मसार । जेहादी ने कपड़े उतार कर दी सीमा पार हम न चलाए गोली,बारूद फिर भी तू कैसे तड़पेगा, खाने को दाने-दाने को पानी को कैसे तरसेगा। ना जलेगा चूल्हा, ना कारखाना चलेगा, ना मिलेगी नौकरी, ना अस्पताल खुलेगा। कराची लाहौर की आंसू से तू प्यास बुझाना, क्योंकि सिंधु अब ना तेरे दर बहेगा। तोड़ दिया तूने सब्र का अंतिम बिंदु बस, अब ना बहे पाक में सिंधु । घिर गया तू निर्णय से पंच अब हुआ अटारी बॉर्डर बंद टूट गई तेरी जीवन की रेखा समाप्त हुआ सिंधु समझौता। अब ना होगा कोई आवागमन, ना होगा कोई व्यापार । 48 घंटे में भारत छोड़ वरन् निकालने को हम तैयार ।। ========================= =======================
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