छंद
परिचय- विषम मात्रिक, 144 मात्रा आधार छंद-- अमृत ध्वनि विधान-- दोहा+मधुर ध्वनि पदांत- चौकल शीर्षक-- दीक्षा दीक्षा पाता श्रेष्ठ जो, रहता वह निष्काम। जीवन भर सुख से रहे, जग में होता नाम।। जग में होता, नाम न खोता, पूजा जाता। वैसे ज्ञानी, बनता मानी, आदर पाता।। गुरु गुण गाना, हरदम पाना, उत्तम शिक्षा। रह संसारी, बन संस्कारी,लेकर दीक्षा।। दीक्षा ऐसी लीजिए, उत्तम दे संस्कार। सफल करे जो जिंदगी, बता जीव का सार ।।* बता जीव का, सार नींव का, अवगुण हरती। ज्ञान सिखाती, मान बढ़ाती, शिक्षित करती। गुरु को जानो, उनकी मानो, पाओ शिक्षा। हरें अज्ञान,दोष को छान, देकर दीक्षा।। नरेंद्र सिंह 26.05.2025
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