आनंद
हर कदम हर दिवस बढ़ते नीत आगे कदम हर कार्य एक प्रयास है अदृश्य पूर्णता का प्यास है। पूर्णता एक कोरी कल्पना है क्या केवल एक प्रिय प्रेरणा है या है इसमें कुछ सच्चाई भी अंतिम पग तक पड़ेगा दिखाई भी। अब कौन बताये ये गूढ़ ज्ञान किसे पता है ये खास विज्ञान प्रयोगों का प्रमेय कौन बताये कौन हमें उचित राह दिखाए। अभी तक तो अनुभव ही गुरु रहा है त्रुटियों प्रयासों से भरा जीवन रहा है गिरते उठते सीखते ही सम्भले हैं हम बहुतों बार हारे पर अनेकों जीते हैं हम। अब पथरीली पगडंडी से हुआ प्यार है इसी पर चलने का केवल अभ्यास है आता ही है क्या मुझे बस और शेखर पूर्णता के खोज में ही मिलता आनंद है ।
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