जीवन
हर दिन होता नया जन्म है सुबह से शाम तक जीवन है सोलह घंटे की आपाधापी में क्षण क्षण बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ पाना कुछ खोना है थोड़े आंसू थोड़ी खुशी है हर दिन कुछ नया सीख हर दिन संतोष असंतोष है। जीवन का सार्थक होना जरूरी है आखिरी समय संतुष्टि जरूरी है तय समय में सब पूरा हो साथी नहीं तो जीवन में समय कम है। जब भी जाओ शैय्या पर चाहे नींद की हो या मृत्यु की पछतावा दुश्चिंता से मन रहित निश्चिंतता और संतोष भाव हो। प्रारब्ध इस जीवन का अगली बार काम आएगा आज का सीख व अनुभव अगले जन्म को हर्षायेगा। जीवन सफल करना है तो रोज नया सीखना होगा अपनी क्षमताओं को बढ़ा कर सुख की नींद सोना होगा।
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