कांवर
कांवर के साथ व्रत धारण करना होता है सहनशीलता का, श्रम का, सहयोग का सद्भाव का, सहिष्णुता का, शुद्धि का, समर्पण का समानता का, समरसता का, संघर्ष का,सत्य का। किसी भी परिस्थिति में व्रत नहीं तोड़ना होता है त्यागना होता है अपने गुस्से को, अपने अहम् को, अपने आडंबर को, अपनी छुद्रता को, अपने लोभ को अपने ईर्ष्या को, अपने झूठ को, अपने अनैतिकता को। अगर इतना न कर पाओ तो कांवर मत उठाना अपने आचरण से इस परंपरा को बदनाम मत करना ये शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं, आत्म जागरण के लिए है दुसरों को कष्ट देने के लिए नहीं, स्वयं कष्ट सहने के लिए है कांवर केवल शिव के जलार्पण का साधन नहीं ये तो आपके आत्म अवलोकन का साधन है अपने जीवन में जीवन मूल्यों के जांच का साधन है अपने जीवन से बुराईयों को दूर करने का एक प्रयोग है।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
