अरावली बचाओ
माया का लालच इतना भारी, चंद पैसों की खातिर, अरावली को उजाड़ने की करली तैयारी। हरे भरे पेड़ो को फिर से उखाड़ा जाएगा, सिर उठाए पर्वतों को भी झुकाया जाएगा। भोली भाली जनता को फिर से धर्म का नशा चखाया जाएगा। अपने मित्रगणों की खातिर, अरावली को वीरान बनाया जाएगा। आज़ाद परिंदों के घरों को उजाड़कर, बेघर बनाया जाएगा, अनबोल अनजान जीवो को फिर से सताया जाएगा। प्रदूषण का कारण अरावली को बताया जाएगा, मीडिया के जरिए उद्योगपतियों को बचाया जाएगा। बुलडोजर लगा कर पहाड़ों से धन कमाया जाएगा, हरी भरी अरावली को सुनसान बनाया जाएगा। सिर्फ़ स्टेटस लगाकर कुछ भी न हाथ आएगा, हम सब एक होंगे तभी अरावली को बचाया जाएगा।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
