" जय बोलो अमर शहीदों की "
भारत माता की जय बोलो, बोलो अमर शहीदों की। गाँधी सुभाष आज़ाद भगत, जय हो तात्या टोपे की। सत्तावन के क्रान्तिकाल की, लक्ष्मी बाई की जय हो। राजगुरु सुखदेव कुँवरसिंह, गूँजे जय झलकारी की।। आज़ादी के वरण अर्थ में, वीरों ने प्राण गवांये। हँसते हँसते फाँसी झूले, तनिक खौफ़ नहि खाये। राष्ट्र प्रेम में मर मिट जाना, जिनके दिल की इच्छा थी। हुए वीरगति प्राप्त वतन हित, निज जीवन शान बढ़ाये।। राणा वीर शिवा की धरती, धरती वीर नारियों की। जय कहो जानकी देवी की, और अवन्ती बाई की। कनकलता बरुआ की टोली, गोली की परवाह न की। चढ़ी कनक थाने के ऊपर, और तिरंगा फ़हरा दी।। सोलह साल की बाला ने, बहु गोली सीने खाई। गोली से घायल होकर भी, ध्वज भारत का फहराई। आज़ादी का अमृत महोत्सव, इन वीरों को याद करे। गगनगोचरितध्वज फहराकर, नित इनकी जयघोष करे।।
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