शीर्षक :गंगा के होवे उद्धार
गंगा के होवइ उद्धार हो, सरकार से करहु विनतिया, करहु विनतिया हो करहु विनतिया, गंगा के होवइ उद्धार हो, सरकार करहु मिनतिया। गंगा में भरल गाद निकलवावे, सहर के कचरा कोय नै गिरावे, कुछो होवइ एकर उपचार हो, सरकार से करहु विनतिया। लोगन से भी हम्मर गुहार हो, जे सुधारथी अप्पन अदतिया, गंगा के रखथी सभे मान हो, बचइ सनातन के इजतिया।। नरेन्द्र सिंह, अतरी, गया 03.01.2025
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