शीर्षक : ये नजरे
कभी नजरे तेरी मुझे देखती है तो यही नजरे इश्क मे बदलती है और तुम प्रेम को फरमाती है और इश्क इग्नोर करती है... ।।धृ।। दौलत तो आप है हमारी जान तो कब की दी हुई है राज की बात न खोलो आप क्यूंकि रात भी रूठी हुई है ये नजरे बेशुमार कर देती है तो और तुम दिल घायल करती है और तुम प्रेम को फरमाती है और इश्क इग्नोर करती है...।।१।। क्यूं न कुछ रस्ते भी होते है ओ आसान बन जाते है साया बनकर साथ रहते है और प्यार की उम्मीद जगाते है ये नजरे दौलत भरी होती है ओ नजरे किसी से न डरती है और तुम प्रेम को फरमाती है और इश्क इग्नोर करती है...।।२।। धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२ समय :१०:०७ मिनिट तारीख :०६/१२/२०२४ सोमवार
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