स्नेह रंग प्रीत का
रंगों का त्यौहार आ रहा है वल्लभा! पर इस बार मैं तुम्हारे पास नहीं हूं। तुम ही मेरी हर ऋतु, हर मधुमास हो जीवन की इस बगिया में महकी आस हो। यदि इस बार न सजा सकूँ तुम्हें अबीर से, तो शब्दों से ही रंग बरसाता हूँ। अपने हर श्वास के स्पंदन में वल्लभा! तुम्हें प्रेम का चिर-आलिंगन दे जाता हूं। आना अगली होली में ऐसे मिलकर, कि दूरी का कोई नाम न रहे। तुम संग हो तो हर दिन उत्सव है, वरना जीवन बस एक विराम सा रहे। रंगों का त्यौहार आ रहा है वल्लभा! और तुम ही मेरी सबसे सुंदर कथा हो मेरी हर कविता का पहला रंग हो तुम, मेरी हर धड़कन की मधुर व्यथा हो। #abhiksha💝
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