"चाँदनी सी मैं"
नीले आसमान में चाँदनी जैसी, सपनों में बसती एक कहानी जैसी। भावनाओं की बूँदों से सजी हुई, प्यार भरी वो रुहानी जैसी। संवेदनाओं का समंदर हूँ मैं, हर दिल में बस जाने वाली छाया हूँ मैं। कभी मुस्कानों की बारिश हो जाऊं यह कभी अश्कों का समंदर हूँ मैं । भुलावनी वजहें भी हैं मुझमें हर दिल को जोड़ने की चाहत भी है। दर्द किसी का भी देख न पाऊँ, बस खुशियों को बाँटना भी फितरत है। हँसी मेरी जादू सा असर करती, हर उदासी को खुल कर उड़ा देती। चुटकुलों की बौछार करूँ तो, पत्थार भी हँसने लगते हैं, ये देखो तो! कभी मोम जैसी पिघल जाऊँ, तो कभी चट्टान सी बन जाऊँ। हर मुश्किल को हँस के हराऊँ, खुद से प्यार करना सिखलाऊँ। रूप हूँ, राग हूँ, रोशनी हूँ, ख़्वाबों की प्यारी परछाई हूँ। हर्षिता नाम है मेरा प्यारा, जीवन की मीठी शहनाई हूँ।
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