चेतन के दोहे
जीवन मंत्र रहना स्वतंत्र , दूजी आस तो मन हो उदास ।। क्रोध की बाणी , तो ज्ञानी भी अनाड़ी। अगर है सच्चा ज्ञानी , तो होगी मीठी बाणी ।। खुल के जीना राम रस पीना संतो का साथ , ना होगे कभी उदास हो मीठा सा मन , ना ढूंढे कोई स्वप्न रहे ईश्वर में आस , सोना भी लगे बांस रहे मोह माया जेसी प्यास , आई बाबा भी न लगे खास ।। संतो का चेला , ना होए मतबोला ना ढूंढे वो टोली , और चले अकेला ।। मिट्टी की प्यास , ना लगे ओ व्यास होना हो जब नास , तो बढ़ जावे वास की आस ।। चेतन शर्मा
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