पक्की यारी
पार करके सारे इंतहान कुबूल करली हमने अपनी मन की बात। एक की खामोशी चमकती है साथिया की जान में। हजारों मील की दूरी वो बातों में ही पूरी कर देते। अपने ही बुलबुले में गुम कि जगह ही नहीं किसी और की।
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