कितने मशगूल हो तुम ?
कितने मशगूल हो ?तुम अपनी दिनचर्या में कि तुम्हारे पास समय नहीं है जो बिता सको कोई एक शाम संग अपनों के, किसी मेज पर भोजन करते हुए! गुनगुना सको कोई गीत, कह सको सब बात जिससे मन हल्का हो, और तुम शांत! इतना कि फिर मन करे, ऐसी शामें बनाने को, दोस्तों को बुलाने को । मन करे अपनों के अपनेपन में डूब जाने को । # सारंग मुक्त
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