🫠
गुजरती हैं जो दिल पर वो कहानी याद रखती हूं, मैं हर गुलरंग चेहरे को जबानी याद रखती हूँ। मैं अक्सर खो सी जाती हूं गाली कूचों के जंगल में, मगर फिर तेरे घर की निशानी याद रखती हूँ। मुझे अच्छे बुरे से कोई निस्बत है तो इतनी है, की हर ना मेहरबा की मेहरबानी याद रखती हूँ। कभी जो जिंदगी की बे सबाबी याद रखती हूं, वो सब कुछ भूल जाती हूं जवानी याद रखती हूँ। मुझे मालूम है कैसे बदल जाती हैं तारीखें, इसी खातीर तो मैं बाते पुरानी याद रखती हूँ।
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