कितना नसीब वाला होगा वो शख़्स…
✍️ ईश्वर ढकाल कितना नसीब वाला होगा वो शख़्स, जिसे वो बिन माँगे मिल जाएगी… और एक मैं हूँ, जो उसे पाने की दुआ में ही उम्र गुज़ार जाएगा… वो उसके नाम से सजाएगी अपनी दुनिया, उसके साथ हँसेगी, सपने सजाएगी… और मैं यहाँ उसकी यादों के सहारे, अपनी तन्हाई से दिल बहलाऊँगा… उसके हाथों की मेहँदी में किसी और का नाम होगा, और मेरी उँगलियों में बस खालीपन रह जाएगा… वो किसी और की तक़दीर बनेगी, और मैं अपनी किस्मत को कोसता रह जाऊँगा… कितनी अजीब बात है ना, जिसे मैंने हर साँस में माँगा, वो किसी और को बिना माँगे मिल जाएगी… और मैं लाख कोशिशों के बाद भी, उसे पा ना सकूँगा… शायद मेरा प्यार कम नहीं था, बस मेरी तक़दीर छोटी थी… उसकी खुशियों की दुआ करते-करते, मेरी आँखों की नमी ही मेरी साथी थी… कितना नसीब वाला होगा वो शख़्स… जिसे वो बिन माँगे मिल जाएगी, और मैं… उसे खोकर भी उससे ही मोहब्बत निभाता रह जाऊँगा
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