पक्की गुंजाइश
दिल हाथ में लेकर निकल पड़े है खुद की तलाश औरा में करने। समझ समझ को इतना समझाया कि सारी समझ ही खत्म हो गई। आप को पाने में इतनी देर लग गई कि अपने पराए हर और अनजाने ने समझे हमारे आंसू की कीमत।
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