आओ चली मेरी यादों में!!
न रंग मिल रहे ,न ढंग मिल रहे न तुम मिल रहे ,न जज्बात मिल रहे, मिल रहे हैं कुछ भी तो! हम दोनों के तकरार। रूठना ,गुस्सा ,बेखबरी का क्या ही है काम, थोड़ा सा तो लेके देखो उद्देलित होते मन में मेरा नाम! जान ले लो या ले लो हृदय में स्थान बस अपनी कोमलता को न बनने देना चट्टान तुम ही आभा तुम ही पूजा तुम ही हो अहंकार देना मेरे गुस्से में भी अपना प्यार जैसे लगे आहार हमहूं तो हैं तुम्हारे कुछ ,है प्रिय बदलो अपने विचार खुद गुस्सा न हो ,न होने दो मुझे ऐसे करो प्रयास देता हूं मैं भी तुम्हारा साथ ,सुन तो लिया करो कुछ आज हाथी घोड़े बैंड बाजे अंतर्मन में बजते धुन की साजों से सब कुछ है तुम्हारे लिए ;आओ! चली मेरी यादों में।। आओ! चली मेरी यादों में।।
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