अहसास
●●● हो गया है तो फ़िर निभाया कर। इश्क़ से राब्ता बनाया कर।। तेरे एहसास तेरी दौलत है। ना इन्हें मुफ़्त में लुटाया कर।। ज़ख्म नासूर बनके रिसते हैं। उनको महफ़िल में ना नुमाया कर।। हद से बढ़ जाए अगर ज़ी की जलन। गर्म अश्कों में भीग जाया कर।। लौट आया है फ़िर गया मौसम। उसको हंस कर गले लगाया कर।। दर्द मिलते हैं मोहब्बत में 'अयन'। दर्द से जिंदगी सजाया कर।। ●●● ©deovrat 'अयन' 06.05.2025
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