।।नया साल हो मंगलमय।।
कलरव कपोल की शाखाओं पर नए साल की चादर ओढ़े मौसम ने ली अंगड़ाई है, नया साल हो मंगलमय अपनों के अंतर्मन में उमंग और उत्साह भरे लाए आशाओं के सुनहरे सपने मुरझाए चेहरों पर भी मुस्कान भरे। कलरव कपोल की शाखाओं पर नए साल की चादर ओढ़े दुगुने जोश तरंगों से लक्ष्य को भेदित करने हैं , बहुत हुआ डर से डरना कुछ अलग नया सा करना है उजालों की चाह में सवेरा नहीं आया गुजरे तम की रात में डर की छाया भय की आहट ने दिल धड़काया पर अब मैं काली रातों से नहीं डरता कलरव कपोल की शाखाओं पर ले निश्चय सपनों की राह पर हूँ चलता। नया साल हो मंगलमय नया साल हो मंगलमय।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
