होली का महागान!!
फागुन की पहली दस्तक है धरती ने फिर श्रृंगार किया, मन के सूने आँगन में रंगों ने ऐलान किया। आओ मिलकर गाएँ आज होली का महागान! रंग बने जब प्रेम की भाषा, मिट जाए हर अपमान!! बसंती ज्वाला जल उठे तो साहस का संचार करे, पीत रंग आशा बनकर हर निराशा पार करे। नील गगन-सा विश्वास रहे हरित शांति का विस्तार, लालिमा छू ले जब अधरों को खिल उठे सारा संसार! रंजिश की रेखाएँ धो डालो मन का मैल बहा दो आज, हाथों में हाथ थाम कर सजने दो स्नेह का साज। यह पर्व नहीं बस हँसी-ठिठोली यह संस्कृति का सम्मान, रंगों में रचा-बसा भारत रंगों में उसकी पहचान। रंगों से बढ़कर प्रेम रहे प्रेम से उज्ज्वल प्राण, आओ मिलकर गाएँ आज होली का महागान!!
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