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जमाने मे कही दिल को लगाना भी जरूरी था, गलत कुछ भी नही, लेकिन छुपाना भी जरूरी था। जमाना क्या कहेगा ये सोचा तुमने कभी, जो था दिल मे हमारे वो बताना भी जरूरी था। हमे पत्थर भी खाने थे गाली भी खानी थी, मगर दुनिया को आईना दिखाना भी जरूरी था। हमे हँसते हुए बस देखता तो रूठ जाता वो, हमे हँसते हुए आँसू बहाना भी जरूरी था। न हम सोए न वो सोए, न आई नींद दोनों को, मगर जलते हुए चिरागों को बुझाना भी जरूरी था।
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