तुम
तुम्हारे जानिब जो बैठा रहा मैं उलझा गया हूं हर एक धड़कन किनारे जो अक्सर जीता रहा मैं अभी जरा पैर उतारा है पानी में..
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
तुम्हारे जानिब जो बैठा रहा मैं उलझा गया हूं हर एक धड़कन किनारे जो अक्सर जीता रहा मैं अभी जरा पैर उतारा है पानी में..
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets