कितने बड़े है सपने
कैसे बितती है राते, सूरज के पहरेदारों से पूछो कितने बड़े है सपने, पल पल आते ख्यालों से पूछो कितने अच्छे लगते हैं चांद को, कभी इन दागो से पूछो कैसे कटते हैं दिन, कभी गुमनाम तारों से पूछो क्या खोया है मैंने, सुधरते हालातो से पूछो क्या कमाया है मैंने,चेहरों पे रहती उन मुस्कानों से पूछो हर कदम पर खतरे-काटे है इस पद पर कैसे बच जाता हूं, मेरे रखवालों से पूछो - कार्तिक सिंह ठाकुर
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