बिछा कर रख दी हमने जान हमारी करने को पूरे किसी और के सपने, पर हासिल कर के अपना मुकाम जब वो जा पहुंचे चट्टान के सबसे ऊंची चोटी पर तो जान के बदले हमारा ईमान ही मांग लिए।