मिट्टी में मिलना ही तो है
कहकर मुरझा गई कलियां कल खिलना ही तो है । जी लो तुम जिंदगी मग्न रहकर फिर मिट्टी में मिलना ही तो है । क्या ये फैला आसमा क्या ये बिछी जमी क्या तेरे काम का इस जहां में। कौन तेरे आंसू देखे कौन तेरा ग़म कौन तेरा साथ दे श्मशान में । खिली हूं आज, तोड़ ले गए सब मुरझा गई मै, छोड़ के गए सब । तू हस तेरी हसीं बंट जाएगी तू रो ,अकेली छंट जाएगी । जिंदगी दो पल का दौर मुश्किल का ही तो है जी लो तुम जिंदगी मग्न रहकर फिर मिट्टी में मिलना ही तो है।। ।।।। ज्योति ।।।।
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