अंदाज
अंदाज ============================== पंर नही है फिर भी ऊडने की चाहत है, होशो हवाश के सात अभी जमीनपेही खडा हु, कल कीस ने देखा जीवन आजही मे, है, ईसीलिये जींदा दीली को पाले....., आपनेही एक आलग अंदाज मे हु। जीना तो चाहात और सोपनो का नाम है, अभी जींदा हु, थोडा खुल के जीता हु.........., ईसीलिये लोगो से थोडा अंदाज जुनेका अलग है। ढाई अक्षर प्रेम के सीखने मे अभी कच्चा हु, ईसीलिये प्रेम की भाषा......., समझता और समझोता हु, अंदाज अलग ही सही....., मै खामोश दिलो कोभी पढने कि आदी ह.। माॅबापका लाडला और साथीका प्यारा हु, ईन्सांन हु ईन्सांननीयत की भाषा, खुभ समजता हु......., .। हर हुन्नरी ह, सामनेवालेको आपने हुन्नरसेही समजाता हु, ईसीलिये औरोके मुकाबले थोडा आलग हु, ईसीलिये औरोके मुकाबला थोडा आलग हु। ============================
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
