खोया या पाया
बोल तूने क्या पाया ? तो लिख ...अनुत्तीर्ण पाया ।। और क्या खोया ? जीवन का एक अवसर खोया , परिवार का विश्वास का एक हिस्सा खोया , जीवन के कुछ हसीन पल खोया , शायद परिवार का कर्म ना होता ... तो अपना ये तन भी खो देता ।। क्यों खोया क्यों पाया ? नियति का पता नहीं था इसलिए पाया । मेहनत नहीं थी , इसलिए खोया ।। तो बोल अब क्या सीखा..? जब तक मेहनत पूरी ना हो, तब तक किस्मत में होगा सोच, जंग में मत उतर ।। रख वो हौसला कर वो मेहनत जो , नियति बदल दे । तब लिख तब का सब खोया, अब वक्त से सब पा लिया ।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
