हरि – हर
शिव बड़े या कृष्ण क्यों ये अंतर करते हो क्या तुम उस ईश्वर से तनिक भी नहीं डरते हो आपस में दोनों का कुछ भी नही अंतर रहता है सखा प्रेम इनमें निरंतर शिव के मन में विष्णु का ही तो वास है विष्णु के कण कण में हैं शिव शंकर एक अघोरी है, दूजे पीतांबरी हैं एक त्रिशूल लेकर चलते हैं, दूजे सुदर्शन को धरते हैं एक है सम्पूर्ण काल, दूजा प्रत्येक क्षण हैं एक हैं महाकाल, दूजे नारायण हैं
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