जीत
ये दुनिया और मैं एक साथ कामयाब नहीं हो सकते, हम में से किसी एक को तो हारना होगा। मैं हार चुका हूं पहले ही अपने हिस्से की दुनिया को, इस बार दुनिया को मेरे हिस्से का हारना होगा।। आगे रास्ता खराब है मंज़िल का मुझे किस्मत को भी आजमाना होगा, पैदल ही चलना है यहां से अब इस बस्ते का कुछ बोझ निकालना होगा।। मैं इस उम्मीद में निकल गया हूं इस तपती धूप में की रस्ता लंबा है आगे मौसम सुहाना होगा। ये दुनिया और मैं एक साथ कामयाब नही हो सकते, हम में से किसी एक को तो हारना होगा।। मुझे अपनी हर इक सोच, हर तजुर्बे को यकीन में उतारना होगा। ये जो खुद से करता हूं बदसलूखियां मैं, इस बुरी आदत को अब सुधारना होगा।। मेरी दिल्लगी चांद से है ए चांदनी रात, मशवरा ये है कि तुम्हे खुद को और संवारना होगा। ये दुनिया और मैं एक साथ कामयाब नहीं हो सकते हम में से किसी एक को तो हारना होगा।। मैं इन नदियों और पहाड़ों को पार कर बहोत दूर निकल जाउंगा। कुदरत से उधार मांग ज़मीं दरख्तों के बीच अपना घर बनाऊंगा।। मैं उस घर एक कोने में पत्थर लगा कर उस पर एक त्रिशूल बनाऊंगा। और हर शाम पास बैठ उसे अपना हर एक दुख सुनाऊंगा।। और जब तक वो जवाब देगा मेरे सवालों का मैं शायद उससे पहले ही मर जाऊंगा। अकेले सड़ती लाश में कैद मेरी रूह को आज़ाद कराने को उसे मेरा नाम पुकारना पड़ेगा। बस वहीं जीत जाउंगा मैं और इस दुनिया को हारना पड़ेगा।।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
