एक रात, एक बात लिखूंगा
एक रात, एक बात लिखूंगा.. पूरी दुनिया पढ़ सके इतना साफ़ लिखूंगा.. हर लफ़्ज़ में दर्द होगा, पर मुस्कुराहट के साथ लिखूंगा... ना गिला होगा, ना शिकवा होगा, बस ख़ामोशी का इज़हार लिखूंगा.. जिन लोगों ने तोड़ दिया अंदर से मुझे, उनके लिए भी मैं प्यार लिखूंगा... जिन ख़्वाबों को जीने सा पहले, दफ़ना दिया वक़्त ने मुझे, उन सभी ख़्वाबों का हिसाब लिखूंगा.... तक़दीर के पन्ने तो जल चुके हैं कबके मैं अपनी कहानियों का पूरा आसमान लिखूंगा..... मैं एक रात, एक बात लिखूंगा..........
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