आंखरी पल
अगर यूँ कहु कि ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है। तो कहो मिलने आओगी क्या? अगर यूँ कहु कि नाराज़ बैठा हूँ किसी कोने मे। तो कहो मनाने आओगी क्या? अब तो ये ऑंखें समय लेता है पहचाने मे। गर मुझे देखो तो पहचानोगी क्या? ज़िन्दगी कि समझ कि तुम्हे नहीं समझ पाया। जाने से पहले समझाओगी क्या? अलविदा से पहले तमन्ना है कि मिलु तुमसे। बताओ मुझसे मिलने आओगी क्या? कवि - राहुल पिंडराहाट
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