१८/०९/२०२४
आज न जाने क्यों तुम्हारे झुमके पर क्रोध आने लगा, जब छुआ तुमने ठीक करने को उसे अपने हाथों से, न जाने क्यों मैं उससे जलने लगा, न जाने क्यों उसकी जगह लेने का दिल करने लगा, फिर क्षणभर में ज्ञात हुआ कि वो मात्र झुमका ही तो है। पर क्या प्यार में इतना खो गया की अब तुम्हारे झुमके से भी जलने लगा, लो आज मैं तुम्हारे कानों तक आने को भी तरसने लगा।।
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