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खाली सभी का हो रहा है नेकियों का घड़ा, मगर भरना कौन चाहता है सजदे की हकीकत सबको पता है, मगर करना कौन चाहता है जन्नत की तलब सबको है, मगर मरना कौन चाहता है
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