दिल की बे आवाज अहसास
जब पहली नज़र उस पर पड़ी थी, तो वक्त जैसे ठहर गया था, ना मैंने उसे जाना था, ना उसने मुझे, पर मेरी आँखों ने उसी पल उसे अपना कह दिया था। उसके बाद उसकी तस्वीर मेरे दिमाग से हटती ही नहीं थी, हर जगह, हर पल बस वही नज़र आती थी। मैंने सोचा, काश उससे दोस्ती हो जाए, काश वो मेरी दुनिया में आकर मेरे दिल को समझ पाए। दुआएँ माँगती रही, ख्वाब देखती रही, और धीरे-धीरे मेरी खामोशी मोहब्बत बन गई। पर अफसोस... वो समझ तो गई कि मैं उसे चाहती हूँ, पर चाह कर भी कभी मेरी न हो सकी। आज भी दिल कहता है – “वो मेरी पहली नज़र का इकरार है, भले ही अधूरा हो, पर मेरा सबसे सच्चा प्यार है।”
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