निवेदन
ये अविश्वास कहां ले जाएगा हमें हंगामे से भला क्या हासिल होगा मतदाता में ये महामारी फैला कर बोलो लोकतन्त्र का क्या भला होगा। सभी हंगामेदार तो जीते ही हैं कुछ नामदार पर हारे भी हैं जीत हार तो जीवन का हिस्सा अविश्वास का तो है बस गच्चा। विश्वास से ही चलती है दुनिया इसी डोर से तो एक-दूजे से जुड़ी है दुनिया नाजुक डोर को तोड़ने का प्रयास मत करो दूसरा बांग्लादेश बनाने का अभ्यास मत करो। सीख लिये होते अपने बुजुर्गों से ही सही न आते कभी झांसे में योगेन्द्र जैसों के कभी तुम्हारी अपरिपक्वता तुम्हारी जिद ये पागलपन देश और लोकतन्त्र के विरुद्ध है तुम्हारा षड्यंत्र। देश अभी नाजुक दौर में है विश्वास एकता की जरूरत जोरों पर है अभी तो तुम ऐसे घृणित प्रयास मत करो जनता के बीच अराजकता पैदा मत करो। 🙏🙏🙏🙏🙏
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