"मेहरारू गइल नैहरे"
मेहरारू गइल नैहरे, पति देव ठहरे ठहरे ऊ बनले घर के राजा, जइसे मेहरारू गइल नैहरे तीन दिन में समझ में आ गइल, राज त रहे बस ताज सा!! भउक के कहनी, आजादी मिलल अब ना कोई टोक! पहिले दिन ही चूल्हा बोलल,आ बेटा, अब तू झोंक रोटी बनल नक्शा नेपाल, दाल रही आंदोलन, झाड़ू हाथ में अउतय बुझाइल—घर में लगल इमरजेंसी घोषणा। पड़ोसी हँसे; का भइया, बड़ा शोर मचावत रहीं? हमहूँ कहनी; सरकार गिर गई, अब जनता रोवत रहीं! मेहरारू लौटल तब बुझाइल असली खेल, घर के लोकतंत्र में उहे मुख्यमंत्री, उहे मेल! 😃😁
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