नई रीत
ओ मेरे साथी ओ सहयोगी आओ हम अब सब भूलते हैं एक पुनीत परंपरा के लिए थोड़े सुधारते थोड़े बदलते हैं। आओ मिलकर एक रीत चलाएं एक दूजे के लिए जिएं साथ चलें स्वहित को त्याग परहित अपनाएं जनहित में ही अब सब कार्य करें। थोड़े अपने प्रतिक्रिया को बदलें थोड़ा अपना व्यवहार सुधारें थोड़ा निर्मल अपना हृदय कर लें थोड़ा क्षमा सहनशक्ति बढ़ायें। हम हैं खुशहाली के साथी मिलजुल कर खुशहाली बढ़ायें हर साथी अपना खुशहाल रहे फिर जन जन में खुशहाली फैलाएं। आओ मिलकर वो जगह बनाएँ जहाँ मन की बात हम कह सकें सबकी सुनें और सबको समझे निष्पक्ष हो सबका सहयोग करें । पर भावात्मक बुद्धिमत्ता भी सीखें समय काल परिस्थिति का ख्याल करें जहाँ जैसी प्रतिक्रिया की जरूरत हो वहां वैसा ही हम सब व्यवहार करें। आओ मिलकर एक आदर्श बनाएं अपने कार्यस्थल को दिव्य बनाएं दुनिया हमसे सीखे सहयोग और समर्पण आओ मिलकर हम सब नई दुनिया बसायें ।
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