बेबसी
मुझमें ही कुछ कमी है, जो हार रहा हूं मैं हर रोज़ अपनों को ठेस लगा रहा हूँ मैं न जाने उनको क्या चाहिए क्या दे रहा हूं मैं दिलों को जोड़ते - जोड़ते अपयश ले रहा हूं मैं। चलो छोड़ते हैं अब प्रयास आ जाते हैं अब अपने पास लौट जाते हैं अब मौन साधे दिल में टीस लिए पराजय का भाव लिए। क्षमाप्रार्थी हूं हर अपने का जिनको मैंने ठेस लगाया अश्रुधारा के भंवर में बेवस हो चुका हूं मैं क्या कहना क्या सुनना सब निराधार है अब हिम्मत नहीं बढ़ने का, विश्राम कर रहा हूं मैं।
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