रखैल व्यवस्था
यहां की व्यवस्था रखैल हैं राज कर्ताओ के कोठे पर की और सुरक्षा की बातें सिर्फ़ उनके ओंठो पर की , कल दलितों से किसीने गांव छुड़ाया आज वस्त्र उतारक, लड़कियों को दौड़ाया , दरिंदगी की करदी सारीही हदें पार , नोचकर महिलाओं के जिस्म भरे बाजार , देखकर तमाशा फिर भी चुप हैं , क्यों की यहां की व्यवस्था रखैल हैं।
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