मातरीभासा के अइसन तइसन
बनला मइया अब मम्मी, बाबू भी डैड भे गेला। मातरीभासा के दुरगति, कइसन रिश्ता के खेला । चाचा चाचू,जीजा जीजू दीदी तो दी भे गेल हो गेलो भाई ब्रो अब , गजबे गडबड़ भेल।। बनल पत्नी अब जानु , पति एजी से बेबी बन गेल। सास अइया से बुढ़िया, गोतनी दीदी से भाभी भेल।। गुड़िया,मुनिया भेल डॉली, बुतरू बेटा से बेटू होल। कौची कौची का कहियो, कहे मगही बोले पर लोल।। नरेंद्र सिंह
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
