जल
कही चंचल कही स्थिर हूं मै कही द्रव कही वायू या तो कही घनिभूत हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! कही हूं गहरा कही उथला हूं मै पहाडो से कही गुजरता हूं मै झरनो से कही यु मै गिरता हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! बुझाने प्यास जो तुम नदियों पे आओ तो मधुर मनमोजी हूं मै मिलो जो सागर से तुम अगर तो मै बेखौफ नमकीन निला हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! आंगन मे तुम्हारे कुए मे भरा हूं मै गावों मे मटके सुरइयों मे सजा हूं मै शहरी रसाइयों मे अब - RO प्युरीफाइर मे जा बसा हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! मुफ्त नही ! अब बोतलो मे कैद बिकता हूं मै करदे पतित से पावन तुम्हे वो गंगा हूं मै ना जानो तुम अगर कद्र मेरी तो निगल जाऊ वो समंदर भी मै हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! तपती धूप की राहत हूं मै कुदरत मे जो लौटाए वो सावन की धर हूं मै जमी पर तुम्हारे सुकून की पहली बरसात भी मै ही हूं जल हूं मै, मै ही तो जीवन हूं ! - ✍️ अश्विनी
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