"अनकहे जज़्बात"
"मजाक था यार," जब कोई कह जाता है, दिल का एक कोना चुप हो जाता है। हंसी के पीछे दर्द छुपा होता है, सच को हर बार झूठ बना देता है। "मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता," जब वो कहता है, दिल अंदर से धीरे-धीरे टूटता है। लफ़्ज़ तो बेपरवाह बन जाते है पर रातों में आंसू हर ज़ख्म दिखाते है। "इट्स ओके," कहकर वो मुस्कुराता है, अंदर का तूफ़ान कोई देख नहीं पाता है। बोलते-बोलते उसकी रूह चुप हो जाती, पर दिखावा करने की आदत रह जाती। "मुझे अकेला छोड़ दो," जब वो कहता है, साथ की चाह दिल में ही रहता है। शब्दों के पीछे का सन्नाटा सुनो, उसकी आँखों के दर्द को चुनो। "पता नहीं," जब कोई जवाब देता है, हर सच को वो झूठ बना लेता है। उनकी खामोशी को समझने की कोशिश करो, क्योंकि हर जख्म चुपचाप नहीं भरा करता।
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