भीषण गर्मी
तड़प रहे हैं लोग,प्रकृति जो करवट ली है। कठिन समय संयोग,भानु ने विपदा दी है।। सड़क डगर सुनसान,हाल जो बता रही है। लोग बाग हलकान,गर्म लू सता रही है।। मनुज समझ संकेत,द्वार पर संकट आया। शीघ्र करो निपटान,इसे जो तुमने लाया।। समय करो मत व्यर्थ,छोड़ दो अब पछताना। हरा करो भूखण्ड, वृक्ष अब अधिक लगाना। नरेंद्र सिंह,
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