"जीने की वजह"🌸
दरवाज़े को दस्तक ज़िंदा रखती है जैसे दिल को धक-धक ज़िंदा रखती है आ जाते हैं शाम ढले कुछ दोस्त यहाँ हम जैसों को बैठक ज़िंदा रखती है मंज़र को ज़िंदा रखती है नजर नजर को 'ऐनक' ज़िंदा रखती है जैसे ही चुप होते हैं मर जाते हैं कुछ लोगों को बक-बक ज़िंदा रखती है जो चला गया उसे ज़िंदा रखता है ये दिल और जो बच गए हैं उन्हें याद ज़िंदा रखती है टूट कर भी खड़े हैं हम किसी आस के सहारे हम जैसे लोगों को बस उम्मीद ज़िंदा रखती है
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