मेरे अपने
मत हो निराश प्रिय बात नहीं कोई खास प्रिय बस प्रबंधन है प्रयासों का खुशहाली के साधन का। जीवन नाम है आज का आज में जीने के प्रयास का एक कल तो जा चुका है और दूजा अभी नहीं है जन्मा । जिसका अभी अस्तित्व नहीं उसका कोई मोल नहीं है मोल है बस आज किए कर्म का तभी जन्म होगा सुखद सौभाग्य का। चलो अब केंद्रित होते हैं आज की साधना में लगते हैं प्राण प्रतिष्ठा आज की करें बस में है जो उसे मजबूत करते हैं। मुझ पर विश्वास करो मेरा प्रेम स्वीकार करो सर्वस्व मेरा आप ही हो मनोबल प्रेरणा आप ही हो। मुझसे किसी का अहित न होगा विश्वास दिलाता हूं मैं आपका एक शुभचिंतक केवल सही राह दिखाता हूं।
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