अधूरी बातें
मुझे बताना है तुम्हे कि , अब बदल गया हूं मैं । प्यार बेशक आज भी करता हूँ मगर जताना भूल गया हूं मैं ।। गुस्सा आज भी आता है तुम पर ! लेकिन उस गुस्से को , दबाना सीख गई हूं मैं । तुमसे बाते करने की आज भी तलब उठती है मगर उस तलब को अपने अंदर दफन करना सीख रहा हूं मैं ।। दिल में आज भी दर्द होता है मगर उस दर्द को छुपा कर मुस्कुराना सीख सीख गई हूं ! 🥀♥️ • *अधूरी अभिलाषा*
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
